क़ुदरत ने स्त्रियों को एक शक्ति ऐसी दी है जिसके सामने दुनिया का लगभग हर पुरुष पराजित हो जाता है। असल में अच्छे-अच्छे क़ाबिल धैर्यवान अहिंसक लड़कों का मनोबल और धैर्य तोड़ देने की ताक़त स्त्रियों में होती है। कुदरत से उन्हें यह गुण तो मिला हुआ है। “जहाँ ना पहुँचे रवि वहाँ पहुँचे कवि” की तर्ज पर “जिसे ना तोड़ पाए कोई मज़दूर मिस्त्री उसे तोड़ देती है स्त्री” प्रासंगिक जान पड़ता है।
अभी हाल फ़िलहाल में छत्तीसगढ़ के एक स्थानीय फ़िल्मकार मोहित साहू पर एक महिला ने मारपीट का आरोप लगाया और लहूलुहान उसी हालत में थाने गई। मोहित का तो मीडिया ट्रायल मास लेवल पर हो गया कि जिस लड़की के साथ रिश्ते में है उसी लड़की पर ऐसे हाथ उठाया है। प्रथम दृष्ट्या किसी को भी यही लगेगा कि गलती लड़के की है। लेकिन कई बार हिंसा करने वाले के पक्ष को नहीं देखा जाता था। जैसा कि मैंने पहले कहा क़ुदरत ने स्त्रियों को वो शक्ति दी है जिस शक्ति के बल पर वह अच्छे से अच्छे अहिंसक शांतचित्त पुरुष को भी हिंसक बना सकती है। पूरी संभावना है कि इस वाले मामले में भी यही हुआ, आज पता चल रहा है कि मोहित ने तनाव में आकर फिनाइल पी लिया और अस्पताल में भर्ती है। इस घटना पर पत्नी से बाहर देर तक घूमने के एवज में डाँट खाए एक दोस्त ने कहा - “पुरुषों के केवल पैंट में चैन होता है, जीवन मैं चैन नहीं होता है।”
कई ऐसे लड़कों को जानता हूँ जिन्होंने जीवन में किसी को रे बे तक नहीं किया होगा, तमाम तरह के व्यसनों से दूर रहे, परस्त्रीगमन छोड़िए किसी को आँख उठाकर देखा तक नहीं होगा। ऐसे लोग भी एक समय के बाद रिश्तों की समस्याएं बताते हुए कहते मिले कि कई बार ऐसा होता है तनाव इतना हावी होता है कि मन करता है एक थप्पड़ रसीद कर दिया जाए। कई ऐसे लड़के होते हैं तो अपने जीवन का 3-4 दशक बिना किसी प्रकार की हिंसा किए निकाल चुके होते हैं लेकिन एक स्त्री जब हिंसक मानसिकता लिए उसके जीवन में आती है तो उसका जीवन नरक कर देती है। और यह बात स्त्री और पुरुष दोनों पर लागू है। दोनों को एक दूसरे की निजता का बखूबी सम्मान करना चाहिए। एक दूसरे के जीवन में बहुत ज़्यादा नहीं घुसना चाहिए। चाहे वह प्रेमी-प्रेमिका वाला रिश्ता हो या शादी का, अगर उसमें आपको अपने साँस लेने लायक स्पेस नहीं मिल रहा है, जबरन बहुत बेफ़िजुल की छोटी-छोटी बातों पर असुरक्षा का भाव पैदा हो रहा है और उस भय से कब्ज़ा कर लेने वाली प्रवृति पैदा हो रही है इसका अर्थ यह है कि गाड़ी सही नहीं चल रही है। इसीलिए देखने में यह आता है कि अधिकांश रिश्ते कुछ समय बाद दो भिखारियों की छीनाझपटी में बदल जाते हैं। क्यूंकि जो दोनो के पास नहीं है वही एक दूसरे से मांग रहे होते हैं।
हमारे यहाँ रिश्तों में इतने भयानक स्तर पर असुरक्षा है कि जब-जब इंसान शादी के बंधन में बंधता है या अपने रिश्ते के बारे में लोगों को बताता है तो उसके दोस्त कम होने लगते हैं। इसमें भी कारण वही है कि वे बतौर दोस्त भी वे लोग जो बतौर दोस्त अब तक साथ थे वे भी कुछ हद तक आपको अपनी अथॉरिटी मानने लगते हैं। रिश्तों में अधिकतर यह देखने में आता है कि हमारा अपना जीवन उबाऊ नीरस होता है लेकिन उसे हम अपने पार्टनर के सहारे मनोरंजक बनाने की कोशिश करते हैं और फिर इसके भयावह दुष्परिणाम आते हैं, उन्हीं पर फिर टीवी सीरियल पर भी बनते हैं और जब यही भड़ास हिंसक रूप ले ले तो क्राइम पेट्रोल सावधान इंडिया के एपिसोड बनते हैं। रिश्तों में असुरक्षा संबंधी इन समस्याओं से कोई भी भारतीय अछूता नहीं है लेकिन इन समस्याओं को स्वीकार करते हुए हमेशा असुरक्षा कम करने का प्रयास होना चाहिए।
चलते चलते : पंजाबी में एक कहावत है - “ एक चुप सौ सुख “, गृहस्थ जीवन जी रहे तमाम स्त्री-पुरुषों को सादर समर्पित।
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